Skip to main content

हे कोरोना


 हे कोरोना  ! अब तुम भाग जाओ ना  , 

अब अपने घर भी लौट जाओ ना |


तुझे इतना भी नहीं पता कि, 

दूसरे के घर ज्यादा दिन नहीं टिकते , 

प्लीज,अब अपने घर भी लौट जाओ ना |


क्योंकि, वो अपना घर ही जमा लेते

इसलिए हम मेहमानों को सर पर नहीं चढ़ाते, 

अब अपने घर भी लौट जाओ ना |


हमनें तुम्हारी खातिरदारी में कुछ कमी रखी क्या? 

अब मेरी बात भी रख लो ना , 

अब तुम अपने घर भी लौट जाओ ना |


क्या तुझे नहीं पता, तेरा हो रहा है इंतजार

घरवाले हो रहे हैं, बैचेन तेरे लिए

अब "सोनी "की भी मान जाओ ना |

अब प्लीज, अपने घर भी लौट जाओ ना  |



Hey corona! Now you run away, don't you?

 Now return to your home too.




 You don't even know that,


 Other's houses do not last long,


 Please, now return to your home too.




 Because, they would collect their own house


 That's why we don't offer guests on the head,


 Now return to your home too.




 Have we put anything short on your sake?


 Now keep my point too, don't you?


 Now you also return to your home too.




 Don't you know, waiting for you


 Householders are getting restless for you


 Now also agree to "Sony".


 Please, return to your home too.

Comments

Popular posts from this blog

संक्षिप्त नहीं हो पाता , विस्तार कर देती हूँ

 संक्षिप्त नहीं हो पाता, विस्तार कर देती हूंँ | कितना भी कोशिश करूं, मैं बातों को तिल से ताड़ कर देती हूंँ | ना संक्षिप्त कहना आता है ,ना  सुनना आता है  कुछ ऐसे भी हैं  , जिन्हें इनकार कर देती हूंँ |  हरदम बूढ़े -बुजुर्गों का जय - जयकार कर लेती हूंँ | बात ही होते हैं कुछ ऐसे ,जो तिल के लायक नहीं होते  उन्हीं बातों को अकसर तिल से ताड़ कर देती हूंँ |  ऐसे ही लोगों का परित्याग कर देती हूँ | बात करने का यह तरीका भी , कितना खूब भाता है  इसी तरह से , मैं विचार कर लेती हूँ |  ना जाने , कितने को दूर से पास कर लेती हूंँ | अकसर खुलकर नहीं बोलने से , बहुत से रिश्ते टूट  से जाते हैं  किसी का हमदर्द बनने के लिए , मैं विस्तार से सुनती हूंँ |  किसी का गम बाॅटने के लिए , मैं तैयार ही रहती हूंँ | आदत है विस्तार तो , विस्तार कर लेती हूंँ  अकसर मैं अपने कामों को , दिन से रात कर लेती हूंँ |  कभी-कभी तो खुद से तकरार कर लेती हूंँ | कहना होता है थोड़ा  , पर्याप्त कर लेती हूंँ  ना जाने क्यों , दूसरे का परवाह कर लेती हूंँ |  कभ...

मैं नारी हूँ

मैं नारी हूँ  , मैं नारी हूँ    मैं दुर्गा , राधा , काली हूँ   | मैं लक्ष्मी , सरस्वती , सीता हूंँ मैं भगवद्  की गीता  हूंँ  |  मैं नारी हूंँ , मैं नारी हूंँ  ||  मैं गायत्री , सती , सावित्री  ,  मैं धर्म की प्रणेता हूंँ  | मैं शक्ति हूंँ  , मैं रक्षक हूंँ  मैं ही सृजनकर्ता हूंँ   |  मैं नारी हूंँ  , मैं नारी हूंँ   || मैं माँ , बहू ,बहन और बेटी हूंँ  मैं लक्ष्मी स्वरूपा पत्नी हूंँ  |  मैं रूपवती  , मैं गुणवती  मैं ही तो सहनशक्ति हूंँ | मैं नारी हूंँ  , मैं नारी हूंँ    | | मैं अच्छी हूंँ , मैं अच्छी हूंँ  देखो इधर , मैं सच्ची हूंँ  |  मैं ढाल हूंँ  , मैं ढाल हूंँ     मैं शत्रुओं की काल हूंँ  |  मैं नारी हूंँ  , मैं नारी हूंँ  | | मैं  पूजा , अर्चना और साधना हूंँ  मैं आरती और प्रेरणा हूंँ   | मैं शांति हूंँ , मैं श्रद्धा हूंँ   मैं ही तो समृद्धि हूंँ ...

सबके लिए तुम खास हो

बच्चे -बूढे और सयाने , सब हैं मोबाइल के दीवाने बड़े काम की चीज है , रखना बहुत जरूरी है | किसके  नहीं यह पास है , सबके लिए यह खास है  जीवन तुम  बिन अधूरे , तुम्हारी दया की आस है | तुम्हें रखना ना लोग भूलते , तुम्हारी सम्मान  सब हैं करते  चाहे बटुआ भूल जाएं ,जीवन-साथी  रुठ  जाएं  | सब तेरे  में ही है दाता , सब कुछ  तुममे हैं समाता रेडियो तुम में , टीवी  तुम में ,सारे न्यूज का भंडार  तुम्हीं में  टॉर्च  तुम में ,घड़ी तुम में ,सारे कुकिंग की विधि तुम्हीं में  कैमरा तुम में ,आईना तुम में ,सारे  कान्टैक्ट की लिस्ट तुम्ही में   रिश्ते तुम में ,नाते तुम में लड़का-लड़की की बातें तुम्हीं में  ग्रुप तुम  में  समाज तुम  में  , फेसबुक की किताबें तुम्हीं में | बैंक तुम  में बैलेंस तुम  में ,सारे दुनिया का व्यापार तुम्हीं  में  ज्ञान तुम में विज्ञान तुम में  , "सोनी " का मन भी तुम्हीं में | तुमसे कोई रूठ ना पाएं , तुम्हारी बिना कोई रह ना पाएं  सबके लिए तुम खा...